Byomkesh Bakshi Episode 28: Kamra No. 102 (कमरा नंबर एक सौ दो, Room number 102, Room Nombor Dui, রুম নম্বর দুই, 1964)

Story and Plot (1964)
A murder occurs in room number 102 of the Nirupama Hotel. In the morning, when a servant and manager of the hotel knock on the door and it does not open, they break the door to see that the allottee of the room is lying dead. The name of the deceased was Sukant Som, who often used to come to Calcutta in connection with work and stayed in this hotel.

On examining, it is revealed that Sukant was a famous actor whose face had deteriorated after an accident and then his film career was over, after which he started working to blackmail people.

निरुपमा होटल के कमरा नम्बर 102 में एक हत्या हो जाती है. सुबह के समय जब होटल का एक नौकर और मैनेजर दरवाज़ा खटखटाते हैं और वो नहीं खुलता है तो वो दरवाज़ा तोड़ कर देखते हैं की अंदर रूम जिसको अलॉट था उसकी लाश पड़ी है. मरने वाले का नाम सुकांत सोम था जो की अक्सर काम के सिलसिले में कलकत्ता आता रहता था और इसी होटल में रुकता था.

तफ़तीश करने पर पता चलता है की सुकांत एक मशहूर ऐक्टर था जिसका एक हादसे के बाद चेहरा ख़राब हो गया था और फिर उसका फ़िल्मी सफ़र ख़त्म हो गया था जिसके बाद से वो लोगों को ब्लैक्मेल करने का काम करने लगा था.

Characters in the Story:
  • Deepak Qazir - Inspector
  • Chandra Mohan - Hotel Manager
  • Hanif Zahoor - Gunadhar (Servant)
  • Shivaji Sanyal - Rampirit Singh
  • Raman Wadhwan - Dr. Shobhna Roy
  • Minaxi Shukla - Latika Chaudhary
  • Abdul - Sachin Sanyal
  • Tushar Trivedi - Jagbandhu Patra
  • Mansoor - Police Doctor



READ MORE

Byomkesh Bakshi Episode 27: Paheli Gatha (Puzzle, पहेली, Hneyalir Chhondo, হেঁয়ালির ছন্দ, 1963)


Story and Plot (1963)
कहानी 1964 में हुए ढाका दंगों की पृष्ठभूमि पर आधारित है जिसके बाद पश्चिमी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना था. कहानी में ढाका के दंगो का प्रसंग लिया गया है जो की कहानी को दिलचस्प बनाता है। 

ब्योमकेश और अजित जिस बिल्डिंग मे रहते हैं, उसी की एक कॉमन मेस मे बिल्डिंग के लोगों का आना-जाना लगा रहता है। बिल्डिंग मे तीन और लोग रहते हैं, भूपेश चटर्जी, बनमाली चंद्र और राम रॉय जो की साथ बैठ कर कभी कभी ब्रिज खेल कर अपना समय बिताते हैं। एक दिन भूपेश बाबू अजीत से मिलनते हैं और उसको ब्रिज खेलना का न्योता देते हैं। अजीत उनके घर जाता है और वहाँ अच्छा टाइम-पास होता है। इस समय ब्योमकेश घर मे नहीं है और किसी काम से कटक गया हुआ है।

इसी बीच एक घटना होती है। सबसे नीचे के फ्लोर पर रहने वाले नटवर के कमरे से एक धमाके की आवाज आती है। जाकर देखते हैं तो पता चलता है की नटवर की किसी ने गोली मार कर हत्या कर दी है और हत्यारे मे पिस्तौल खिड़की के पास छोड़ दी है।

भूपेश बाबू का कहना है की वो धमाके की आवाज सुनते ही नटवर के कमरे मे पहुचे थे और जब खिड़की से उन्होंने देखा तो एक गेरुआ रंग का शॉल पहने एक आदमी भागता दिखाई दिया।

पुलिस केस की तफ़तीश मे लग जाती है और तभी ब्योमकेश कटक से वापस आ जाता है।


The Story is based on Dhaka Roits in 1964 when East Pakistan was divided as Bangladesh. The story takes a reference to the Dhaka riots that make it very interesting.

Byomkesh and Ajit reside in the building in which a common mess of the people of the building keeps visiting. Three more people live in the building, Bhupesh Chatterjee, Banmali Chandra, and Ram Roy who often spend their time playing bridge. One day Bhupesh Babu meets Ajit and invites him to play bridge. Ajit goes to his house and has a nice time there. At present, Byomkesh is not at home and is cut off from work.

Meanwhile, an incident occurs. A banging sound comes from the room of Natwar who lives on the lower floor. After going to see, it is revealed that Natwar has been shot dead by someone and the killer left the pistol near the window.

Bhupesh Babu says that he reached the room of Natwar on hearing the blast and when he looked through the window, a man wearing an ocher shawl appeared.

The police gets involved in the case and only Byomkesh returns from Cuttack.



READ MORE

Byomkesh Bakshi Episode 26: Chakrant (चक्रांत, The Crooked Circle, Dushtochokro, দুষ্টচক্র 1963)

Chakrant


Story and Plot (1963)
Businessman Bishupal's private doctor Dr. Rakshit comes to meet Byomkesh. He tells him that Bishupal sent him to meet with Byomkesh. He tells that Bishupal got paralysis three months back and now he can't walk.

On Dr. Rakshit's request, Byomkesh comes to meet Bishupal, and then he tells him that a few months back one of his old friend's son Abhay Ghoshal came to meet with him. That was really a nice meeting but after that, some circumstances arose that Abhay threatened him to kill. He went into shock after that threat and got a heart attack as well as a paralysis attack.

The story takes anoth turn when Abhay Ghoshal is murdered.

डॉक्टर सुरेश रक्षित ब्योमकेश बक्शी से मिलने आते हैं और उसको बताते हैं की वो एक बहुत अमीर व्यक्ति बिशुपाल का इलाज कर रहे हैं और उन्ही ने उनको बोयमकेश से मिलने भेजा है. वो बताते हैं की बिशुपाल को तीन महीने पहले दिल का दौरा पड़ा था और उसके बाद उनके पैर में लकवा लग गया.

ब्योमकेश बिशुपाल से मिलने जाता है और तब बिशुपाल बताते हैं की कुछ समय पहले उनके एक पुराने दोस्त का बेटा अभय घोषाल उनसे मिलने आया था जिससे बहुत समय बाद मिल कर उनको बहुत अच्छा लगा मगर उसके बाद कुछ घटना ऐसी हुई की अभय घोषाल ने उनको जान से मारने की धमकी दे दी. वो इस धमकी से इतना ज़्यादा घबरा गए की उनके दिल का दौरा पड़ने के बाद पैरों में लकवा लग गया और अब वो कभी चल नहीं पाएँगे.

कहानी में नया मोड़ तब आता है जब इस मुलाक़ात के कुछ समय बाद अभय घोषाल की हत्या हो जाती है.

Ponchasher Monnontor (Byomkesh (Bengali) Season 5)

Language: Bengali
Year: 2020
Director: Soumik Halder

Part 1: https://www.mxplayer.in/...byomkesh-bengali/...ponchasher-monnontor
Part 2: https://www.mxplayer.in/...byomkesh-bengali/...khnuji-khnuji-nari




READ MORE

Byomkesh Bakshi Episode 25: Balak Jasoos (The Magnificent, बालक जासूस, Mognomoinak, 1963)


Story and Plot ()




READ MORE

Byomkesh Bakshi Episode 24: Bemisaal (बेमिसाल, One and Only, Adwitiyo, অদ্বিতীয় 1960)


One morning, Byomkesh and Satyawati are arguing with each other. Byomkesh is glorified in the glory of men and Satyawati is praising women that women are better than men and their criminal record is negligible. Then a letter arrives. This letter has been written in great detail, which has a total of 4-5 pages. Byomkesh speaks to Satyawati to read the letter, written by an old man named Chintamani Kundu.

Chintamani is 57 years old and has a bad leg due to which he is able to walk a little. He lives alone in his house and a servant Ramdin also stays with him who takes care of him. His house is in a wide street and right in front of the house, his 2 and similar houses are also adjacent which he takes on rent. They spend their time sitting at the window of their house and keep watch on the commuters. He has also taken a telescope so that the outside view looks better. Everything was going well, but then an incident happened due to which they are now caught in the police.

His one house vacated from quite some time, seeing that one day a boy came to meet them. He wore a black overcoat, black glasses and a black hat which called his name Tapan Sen. He wanted to rent the front house. He told that he wants to live there with his wife Shanta. His job is at night so he leaves in the evening and comes back in the morning. Chintamani liked the boy and gave him the house for a rent of 150 rupees per month. After this, he often saw that in the day, Tapan's wife Shanta used to leave home to go to his school and in the evening, Tapan leaves for his job. Shanta used to visit Chintamani often and seemed to be a very decent woman.

Ane night when Chintamani could not sleep, he opened the window to spend some time and saw that Tapan killed a man and ran away. At the same time, Chintamani called the police and told them that there was a dead body in front of his house and the deceased was killed by his tenant Tapan. In a short time, the police arrived and in Tapan's house, they found Tapan's wife Shanta, which they kept under their supervision. Police said that the person who died is his man, whose name is Vidhubhushan. After this incident, the police also started suspecting Chintamani and his servant. And due to this, he has written this letter to Byomkesh so that he can get them out of this trouble.


एक सुबह ब्योमकेश और सत्यवती आपस मे बहस कर रहे हैं। ब्योमकेश पुरुषों के महिमा मंडन मे लगा है और सत्यवती महिलाओं की तारीफ कर रही है की महिलायें पुरुषों से बेहतर होती हैं और उनका क्रिमिनल रिकार्ड न के बराबर होता है। तभी एक चिट्ठी आती है। ये चिट्ठी काफी विस्तार मे लिखी गई है जिसमे कुल 4-5 पन्ने हैं। ब्योमकेश सत्यवती से चिट्ठी पढ़ने को बोलता है जो की चिंतामणी कुंदु नाम के एक वृद्ध व्यक्ति ने लिखी है।

चिंतामणी 57 साल के वृद्ध हैं और उनकी एक टांग खराब है जिसकी वजह से वो थोड़ा-थोड़ा चल पाते हैं। वो अपने घर मे अकेले रहते हैं और एक नौकर रामदीन भी उनके साथ रहता है जो उनकी देखभाल करता है. उनका मकान एक चौड़ी गली मे है और मकान के बाहर ठीक सामने उन्ही के 2 और एक जैसे अगल-बगल मकान भी हैं जो वो इराये पे उठाते हैं। वो समय बिताने के लिए अपने घर की खिड़की पर बैठे रहते हैं और बाहर आने-जाने वालों को देखते रहते हैं। उन्होंने एक दूरबीन भी ले रखी है जिससे की बाहर का नजारा बेहतर दिखता है। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था मगर फिर एक घटना ऐसी हुई जिसकी वजह से अब वो पुलिस के चक्कर मे पड़ गए हैं।

ऊनके दोनों मकानों मे से एक मकान खाली पड़ा था जिसको देखते हुए एक दिन एक लड़का उनसे मिलने आया। वो काले रंग का ओवर-कोट, काला चश्मा और काले रंग की हैट लगाये था जिसने अपना नाम तपन सेन बताया। वो सामने वाले मकान को किराये पर लेना चाहता था। उसने बताया की वो अपनी पत्नी शांत के साथ वहाँ रहना चाहता है। उसकी नौकरी रात की है इसलिए वो शाम को निकल जाता है और सुबह वापस आता है। चिंतामणी को लड़का अच्छा लगा और उन्होंने 150 रुपये मे वो मकान उनको दे दिया। इसके बाद उन्होंने अक्सर देखा की दिन मे तपन की पत्नी शांता घर से निकल के अपने स्कूल पढ़ाने जाती है और शाम को तपन अपने घर से नौकरी के लिए निकलता है।

इन्ही सबके चलते एक रात जब उनको नींद नहीं आ रही थी तो उन्होंने खिड़की मे से देखा की तपन ने एक आदमी की हत्या कर दी और भाग गया। उन्होंने उसी समय पुलिस को फोन कर के बात दिया की उनके घर के सामने एक लाश पड़ी है और मरने वाले को उनके किरायेदार तपन ने मारा है। थोड़ी ही देर मे पुलिस आ गई और तपन के घर मे उनको तपन की पत्नी शांता मिली जिसको उन्होंने अपनी निगरानी मे रख लिया। पुलिस ने बताया की मरने वाला उन्ही का आदमी है जिसका नाम विधुबहुषण है। इस वारदात के बाद से पुलिस ने चिंतामणी और उनके नौकर पे भी शक करना शुरू कर दिया। और इस सबसे परेशान होकर ही उन्होंने ब्योमकेश को चिट्ठी लिखी है जिससे की वो उनको इस मुसीबत से निकाल सके।
READ MORE

Byomkesh Bakshi Episode 23: Wasiyat Ka Rahasya (The Will that Vanished, Khuji Khuji Nari, वसीयत का रहस्य 1960 )

Wasiyat Ka Rahasya


Story and Plot (1960)
In the new year, Byomesh receives a letter from his known person Rameshwar Babu. Rameshwar Babu (played by Shail Chaturvedi) is in his eighties who always use to send letters to his known persons and also Byomkesh. His letter looks mysterious to Byomkesh whose contents are below:

Byomkesh Babu, the ocean of wisdom.
Wish you and Ajit Babu my new year greetings. I wish that your intellect continues to shine like the art of the moon. Ajit Babu's pen should grow like a feather of a peacock.

My time is almost over. Yamraj's summons has arrived. Soon the warrant of arrest is out. I have no fear of that, I am trying to knock the doors of Baikuntha Dham before Yamraj's warrant. The only regret will be that in the next Durga Puja, I will not be able to greet you like before.

Before I die, I have arranged my land property. You take care my last wish is fulfilled. I have full faith in your intelligence and understanding.

Goodbye ...

Do not ignore this letter of mine.
I will see from Baikunth that you received 5000 rupees or not.


Getting the letter Byomkesh goes to meet him but Rameshwar's son and daughter in law dont let Byomkesh met with him. Boymkesh also comes to know that they dont let meet anyone with Rameshwar and infact his own daughter Nalini also can't meet him.

ब्योमकेश के घर एक चिट्ठी आती है जिसको रामेश्वर बाबू नाम के एक बुज़ुर्ग ने लिखा है. ब्योमकेश का कहना है की रामेश्वर बाबू हर साल नए वर्ष की शुभकामना देते हैं. उनकी चिट्ठी इस प्रकार है:

बुद्धि के सागर ब्योमकेश बाबू।
आप और अजित बाबू मेरी नए साल की शुभकामनाएं गृहन करे। आपकी बुद्धि चंद्रमा की कला की तरह निखरती रहे यही कामना करता हु। अजित बाबू की लेखनी मयूर के पंख के तरह विकसित हो ।
 

मेरा वक़्त हो गया है, यमराज का समन आ गया है। जल्दी ही गिरफ़्तारी का वॉरन्ट निकालने वाला है। मुझे उससे कोई डर नहीं, मै कोशिश मे हूँ की यमराज के वॉरन्ट के पहले ही मै बैकुंठ धाम के द्वार खटखटाऊ। अफसोस सिर्फ इस बात का रह जाएगा की अगली दुर्गा पूजा मे मै पहले की तरह आपको अभिनंदन नहीं जता पाऊँगा।

अपने मरने से पहले मैंने अपनी जमीन जायदाद का बंदोबस्त कर लिया है। आप जरा खयाल रखना मेरी आखिरी इच्छा पूरी हो। आपकी बुद्धि और सूझ-बूझ पर मुझे पूरा भरोसा है।
 

अलविदा ...
 

मेरी इस चिट्ठी को नजरंदाज मत करना।
आपको 5000 रुपए मिले की नहीं मै बैकुंठ से देखूँगा।


ब्योमकेश को ये चिट्ठी कुछ रहस्यमय सी लगती है इसलिए वो रामेश्वर बाबू से मिलने उसके घर जाता है मगर उसके बेटे और बहु उसको मिलने नहीं देते. इसके अलावा ये भी पता चलता है की वो लोग उनको किसी से भी मिलने नहीं देते हैं और यहाँ तक की उनकी बेटी नलिनी भी उनसे नहीं मिल सकती है.

Ponchasher Monnontor (Byomkesh (Bengali) Season 5)

Language: Bengali
Year: 2020
Director: Soumik Halder

Part 1: https://www.mxplayer.in/...byomkesh-bengali/...ponchasher-monnontor
Part 2: https://www.mxplayer.in/...byomkesh-bengali/...khnuji-khnuji-nari




READ MORE

Byomkesh Bakshi Episode 22: Adrishya Trikon (अदृश्य त्रिकोण, অদৃশ্য ত্রিকোণ)


Story and Plot
Inspector Ramani (played by Shakti Singh) comes to meet Byomkesh and tells him about a case where he knows who is the culprit but not able to arrest him because he don't have any proof against him. He tells him about the murder of his old friend Reba who was married to Sunil who is a spoil-brat. And this was the reason that Sunil's father transferred all his property and business in the name of Reba. Sunil is a cunning man and there is no tuning between the couple.

According to Inspector Ramani, first Sunil started threatening her that she is about to attacked by someone and with a perfect plan he got her killed through a contract killer and then he also killed the contract killer. Ramani knows all the incident but can't do anything

इन्स्पेक्टर रमनी ब्योमकेश के पास एक केस के सिलसिले में आते हैं और उनका कहना है की क़ातिल उनके सामने है मगर वो कुछ कर नहीं सकते. वो रेबा नाम की अपनी एक पुरानी दोस्त के बारे में बताते हैं. वो बताते हैं की रेबा का पति सुनील एक लापरवाह और नक्करा आदमी है इसलिए उसके पिता ने मरने से पहले सारी सम्पत्ति और बिज़्नेस की ज़िम्मेदारी उनकी पत्नी रेबा को दे दी है. सुनील महधूर्त आदमी है और रेबा और सुनील में बिलकुल भी नहीं बनती है.

सुनील ने पहले तो रेबा को डराना शुरू किया की कोई उसको मारना चाहता है और इसी षड्यंत्र के चलते उसने रेबा की हत्या सुपारी देकर एक आदमी से कराई है और मगर कोई सबूत ना होने की वजह से वो उसको पकड़ नहीं सकता.



READ MORE

Byomkesh Bakshi Episode 20: Anjaan Khooni (अनजान खूनी, Shailo Rahasya, শৈল রহস্য)


Story and Plot
Year 1959, Kolkata.
Byomkesh and Ajeeth are invited to a marriage function where he meets with a retired police inspector Neelmani. Neelmani tells him that he belongs to east Bengal but 7 years back after his retirement he shifted to Calcutta. During the discussion, he asks Byomkesh if he ever faces some challenges during a case where he could not found the culprit! After this, he explains a case which he could not solve because the person whom he was assuming the murderer was also killed.

He narrats entire story to Byomkesh and then asks him to reveal the murderer.

सन 1959। ब्योमकेश और अजीत एक शादी के समारोह मे गए हुए हैं जहां उनकी मुलाकात एक रिटायर्ड पुलिस इन्स्पेक्टर नीलमणि से होती हैं। नीलमणि बताते हैं की वो पूर्वी बंगाल से ताल्लुक रखते हैं जो की अब आकार कलकत्ता मे बस गए हैं। सात साल पहले उनका रिटाइअर्मन्ट हुआ है। वो ब्योमकेश से पूछते हैं की क्या कभी ऐसा हुआ है की आप किसी केस का हाल न निकाल पाए हों। और अपने बारे मे बताते हैं की उन्होंने अपने सामने आए सारे केसेज़ को हाल किया मगर एक केस ऐसा था जिसको वो हल नही कर पाए। दरअसल जिसको वो कातिल समझ रहे थे उसी का कत्ल हो गया।

इसके बाद वो पूरी कहानी ब्योमकेश को सुनाते हैं और फिर ब्योमकेश से पूछते हैं की वो बताए की कातिल कौन था.



READ MORE

Byomkesh Bakshi Episode 19: Pahadi Rahasya (पहाड़ी रहस्य, Durgo Rahasyo, শৈল রহস্য 1958)


Story and Plot (1958)
Byomkesh came to meet a frind in pune and from there he goes to Mahabaleshwar. The hotel owner Sohraab Homji is known to his frind who warmly welcomes him. He tells Byomkesh the he baught this hotel just 2 months back and the hotel's earlier owner were two partners, Bengali Bijoy Biswas and Gujarati Manik Mehta. Manik Mehta was also indulged into some illegal deals and police was looking for him. This was the reason he wanted to sell this hotel so he can elope. He sold the hotel to Sohraab and then an incident took place. This was heard from Bijoy's wife Hemwati that Manik Mehta pushed Bijoy into the riffle where few ferocious aminal killed and ete him. Manik Mehta then disappeared with the all the money near 1.5 lac rupee and after this incident Hemwati also left Mahabaleshwar and then disappeared. Byomkesh's friend is saying in contrast to this that this was also planned conspiracy. He also tells that the day Bijoy died the same day all money from Bijoy's account was taken out while Manik's account still has twenty thousand rupees.
ब्योमकेश अपने एक दोस्त के यहाँ पुणे आया हुआ है और वहाँ से वो महाबलेश्वर घूमने आता है। जिस होटल मे वो रुका है वो सर्दी के चलते खाली पड़ा है और वहाँ उसकी मुलाकात होटल के मालिक सोहराब होमजी से होती है। सोहराब उसको बताते हैं की उसने ये होटल 2 महीने पहले ही खरीद है और इस होटल का उससे पहले मालिक भी बंगाली ही था जिसका नाम था बिजॉय बिस्वास और इसका एक गुजराती पार्टनर भी था माणिक मेहता है। 

 माणिक मेहता का इसके अलावा एक अवैध धंधा भी था जिसके चलते पुलिस उसके पीछे पड़ी थी और इसी के चलते वो होटल को बेचना चाहता था मगर होटल बेचने के बाद ही ऐसा सुनने मे आया की माणिक ने बिजॉय बिस्वास को जंगल मे धक्का दे दिया जिससे उसको शेर खा गए और माणिक उसके हिस्से के भी पैसे लेकर भाग गया। हादसे के बाद बिजॉय की पत्नी हेमवती वो जगह छोड़ कर चली गई और फिर उसका पता नहीं चल पाया। 

इसके विपरीत ब्योमकेश के दोस्त का कहना है ये कहानी पूरी तरह से सच नहीं है क्युकी वइजॉय के मरने के अगले ही दिन उसके बैंक से सारा रुपया निकाल लिया गया जब की माणिक के बैंक अकाउंट मे अभी भी 20000 रुपये पड़े हुए हैं।



READ MORE